कवच क्या है, उड़ीसा ट्रेन एक्सीडेंट में कैसे काम आ सकता था

हम इस पोस्ट में आज ये जानेगे की कवच (kavach) क्या है? इसकी विशेषताएं क्या है? और ये कैसे काम करता है? बालासोर, उड़ीसा में हाल ही में ट्रेन एक्सीडेंट ने पूरे देश को शोक में डाल दिया है। इस ट्रेन दुर्घटना में अब तक लगभग 300 लोगों की जाने जा चुकी है और लगभग 400 बुरी तरह से घायल है।  इस दर्दनाक दुर्घटना में, चेन्नई जा रही कोरोमण्डल ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण, इस ट्रेन का अन्य दो ट्रेन, एक मालगाड़ी और हावड़ा सुपरफास्ट से टकराव हुआ था। यह दुर्घटना अब तक की सबसे बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक है।

इस दुर्घटना से पूरा देश शोक में तो है ही परंतु साथ में यह भी सोच जा रहा है कि क्या उड़ीसा ट्रेन दुर्घटना को रोका जा सकता था? इस ट्रेन दुर्घटना के साथ कवच, ट्रेन सुरक्षा प्राणली से संबंधित बातें भी ज़ोर – शोर से हो रही है। यह क़यास लगाये जा रहे कि यदि ट्रेन दुर्घटना वाले रूट पर कवच सिस्टम उपलब्ध होता तो यह दुर्घटना नहीं होती। आइये जानते हैं कि यह कवच क्या है और यह रेल दुर्घटनाओं को रोकने में किस प्रकार सक्षम है? 

कवच (kavach) क्या है?

ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे विभाग ने 23 मार्च 2022 Automatic Train Protection System (ATP) को लाँच किया था। इस ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा बनाया गया है । इसका मुख्य कार्य ट्रेन की पटरी पर दौड़ रही गाड़ियों को सुरक्षित रखना और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाना है ।

कवच की विशेषताएं

  • कवच सिस्टम के माध्यम ट्रेन की गति अधिक होने पर या लोको पायलट के सावधानी ना बरतने पर ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाते हैं।
  • लेवल क्रासिंग गेट पर पहुँचने पर ट्रेन की सीटी स्वतः बजना ।
  • लोको पायलट के मशीन इंटरफ़ेस या इंडिकेटर पैनल पर बराबर ट्रेन के संचलन से संबंधित विभिन्न सिग्नल की जानकारी स्वतः अपडेट करता है।
  • किसी प्रकार की आपदा आने पर SOS फ़ीचर को भी यह कवच सिस्टम सपोर्ट करता है।
  • ख़राब मौसम की स्थिति, धुँध या तेज़ गति होने पर लाइन साइड सिग्नल को रिपीट करता है।
  • इस कवच प्रणाली के अन्तर्गत विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और रेडियो फ्रीक्वेंसी डिवाइस को ट्रेन या लोकोमोटिव, ट्रेन स्टेशन और रेलवे के सिग्नल सिस्टम में इंस्टॉल किया गया है।

कवच (Kavach) कैसे काम करता है?

रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस कवच सिस्टम में safety integrity level – 4 (SIL-4) टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है जिसमें किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना 10,000 वर्षों में एक है। Automatic Train Protection System, कवच का पहला सफल ट्राइल 4 मार्च 2022 को गुलगुद्दा – चिटगिद्दा रेलवे स्टेशनों के बीच हुआ था। इस ट्राइल के दौरान ट्रेन का automatic brake system किसी अन्य ट्रेन की समीप आते है एक्टिवेट हो गया था । इस ट्राइल में चलती हुई ट्रेन अन्य ट्रेन से 380 मीटर की दूरी पर रुक गई थी। विशेषताओं के आधार पर यह कवच सिस्टम काफ़ी प्रभावी है जो कि रेल दुर्घटनाओं को शून्य कर सकता है।

वर्तमान समय में दक्षिण – मध्य रेलवे नेटवर्क का कुल 1455 किलोमीटर का रूट कवच सुरक्षा प्रणाली के तहत आता है जिसमें कुल 65 ट्रेन और 134 ट्रेन स्टेशन शामिल हैं। भारतीय रेलवे की कोशिश है कि इस वर्ष के अंत तक लगभग 2000 किलोमीटर के रेलवे रूट को कवच सुरक्षा प्रणाली के तहत लाया जाये। इस सुरक्षा प्रणाली के तहत लगभग 34000 किलोमीटर के रेलवे नेटवर्क को कवर किया जाएगा। भारतीय रेलवे के अनुसार, Automatic Train Protection System, कवच विश्व का सबसे सस्ता Automatic train collision protection system होगा।

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Automatic Train Protection System (ATP) या कवच सुरक्षा प्रणाली, भविष्य की विभिन्न ट्रेन संबंधित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अत्यधिक प्रभावी साबित होगा। यह सुरक्षा प्रणाली उड़ीसा रेल दुर्घटना में भी सहायक हो सकता था, परंतु उड़ीसा रेलवे रूट पर कवच सुरक्षा प्रणाली उपलब्ध नहीं थी।